इलाज से ठीक हो जाते हैं शिशुओं के टेढ़े पंजे: डॉ योगिता जैन

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इलाज से ठीक हो जाते हैं शिशुओं के टेढ़े पंजे: डॉ योगिता जैन

800 शिशुओं में एक शिशु टेढ़े पंजों के साथ लेता है जन्म
मिरेकल फ़ीट संस्था निःशुल्क इलाज में करती है सहयोग

गोण्डा से अश्वनी गौतम की रिपोर्ट

बहराइच जन्म के समय शिशु के एक या दोनों पैर के पंजे टेढ़े हैं तो उसे क्लबफुट है। सही समय से इलाज होने पर यह हमेशा के लिए ठीक हो सकता है। आमजन को इसके प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से  रास्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत क्लबफुट जागरूकता सप्ताह 29 नवंबर से 04 दिसंबर तक मनाया जा रहा है । जिसके तहत शुक्रवार को सीएमओ सभागार में मिरेकल फ़ीट संस्था के सहयोग से एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला को संबोधित करते हुए अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ योगिता जैन ने बताया कि सामान्य शिशु के पंजे का तला फर्श पर चपटा आता है।  जबकि क्लबफुट में पंजा अंदर और नीचे की ओर मुड़ जाता है। इसका सही समय पर इलाज न होने पर व्यक्ति जीवन भर विकलांग हो सकता है। उन्होने बताया देश में 800 शिशुओं में एक शिशु क्लबफुट के साथ जन्म लेता है । वहीं देश भर में 35000 से अधिक क्लबफुट के नए शिशु हर साल जन्म लेते हैं। लेकिन सौभाग्य वश क्लबफुट यानि टेढ़े पंजों को इलाज से ठीक किया जा सकता है। इलाज जितनी जल्दी शुरू होता है नतीजे उतने ही बेहतर आते हैं। इस मामले में मिरेकल फ़ीट संस्था सहयोग करती है । संस्था के सहयोग से  इस वित्तीय वर्ष में 25 शिशुओं का और पिछले तीन वर्षों में 129 शिशुओं का इलाज कर टेढ़े पंजों को ठीक किया जा चुका है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ राजेश कुमार ने बताया क्लबफुट से पीड़ित शिशुओं को जितनी जल्दी हो सके नजदीकी किसी भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ,प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अथवा जिला अस्पताल के कमरा नंबर 22 में मिरेकल फ़ीट क्लीनिक में संपर्क कर इलाज कराया जा सकता है। इसका इलाज निःशुल्क होता है। इलाज के बाद पंजे ठीक हो जाते हैं । बच्चा चल-फिर और खेल सकता है और एक बेहतर जिंदगी जी सकता है । कार्यशाला में उपस्थित चार बच्चों को मिरेकल फ़ीट संस्था के तरफ से एक विशेष प्रकार के जूते भी उपलब्ध कराए गए। इस मौके पर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के चिकित्सक, आशा कार्यकत्री, आशा संगिनी , डीसीपीएम,  डिस्ट्रिक्ट कंसलटेंट आरकेएसके, सहित तमाम अधिकारी उपस्थित रहे।

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