‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ का समर्थन करती बेबस बेटी और मजदूर पिता के संघर्ष की कहानी है ‘बाबुल’ ,  सितारों संग प्रीमियर आनन्द मंदिर वाराणसी में संपन्न ||

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(सन्तोष कुमार सिंह)

वाराणसी:- भोजपुरी फ़िल्मों के सुप्रसिद्ध निर्माता रत्नाकर कुमार की फिल्म ‘बाबुल’ का ग्रैंड प्रीमियर आनन्द मंदिर, वाराणसी में किया गया। फिल्‍म के प्रीमियर में निर्माता रत्‍नाकर कुमार, अभिनेत्री नीलम गिरी, अभिनेता देव सिंह, संतोष पहलवान, लोकगीत गायक व अभिनेता गोपाल राय के साथ पत्रकार भी उपस्थित रहे। हर वर्ग के दर्शकों को सिनेमा से जोड़ रही भोजपुरी फिल्म ‘बाबुल’ पिता पुत्री के भावनात्मक संबंधों की कहानी के साथ-साथ ही ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और बेटी को सशक्त बनाओ’ के सपने को लेकर जीने वाले एक ऐसे गरीब हाड़ तोड़ मेहनतकस पिता के संघर्ष की कहानी है, जो बेटियों की जिंदगी को खुशहाल बनाने के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर देता है।

वर्सेटाइल अवधेश मिश्रा द्वारा लिखित और निर्देशित यह फ़िल्म भोजपुरी सिनेमा के ओहरा को ऊंचा करने वाला है। भोजपुरी सिनेमा के बारे में जो आम धारणा रही है, उससे कहीं आगे की कहानी है। गीत – संगीत और पटकथा का सामंजस्‍य फिल्‍म को और भी बेहतरीन बनाता है। सामाजिक संदेश और मनोरंजन के साथ बेजोड़ फिल्‍म है बाबुल। इस फिल्‍म की केंद्रीय भूमिका अवधेश मिश्रा, नीलम गिरी, देव सिंह, संतोष पहलवान, अनीता रावत, शशि रंजन, बबलू खान, अंबिका वानी ने निभाई है। तकरीबन साढ़े 300 फिल्मों में एक्टिंग करने वाले अवधेश मिश्रा की बतौर लेखक निर्देशक यह दूसरी फिल्म है। इससे पहले ‘जुगनू’ उन्होंने निर्देशित की थी। इन दोनों फिल्मों का निर्माण वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड्स के रत्नाकर कुमार ने किया है।

अलबम की दुनियां में अपने नृत्य और अदा से धूम मचाने वाली नीलम गिरी ने बतौर अभिनेत्री इस फ़िल्म में पहली बार मुख्य भूमिका निभाई है। 50 से अधिक फिल्मों में काम कर चुके देव सिंह ने इस फ़िल्म में सशक्त भूमिका निभाई है। वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड्स द्वारा “जुगनू” और “बाबुल” का निर्माण यह दर्शाता है कि कंपनी भोजपुरी फिल्मों के स्तर को बेहतर करने के लिए कितनी संवेदनशील है। कंपनी इसके अलावा दर्जन भर और भी विषय प्रधान फ़िल्मों पर काम कर रही है।

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