लखनऊ विकास प्राधिकरण में लागू होगी ई-ऑफिस प्रणाली, नई-पुरानी सभी पत्रावलियां ई-ऑफिस पोर्टल पर होगी अपडेट

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लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अक्षय त्रिपाठी ने अधिकारियों के साथ बैठक कर दिए दिशा-निर्देश

व्यवस्था लागू होने से विभागीय कार्यों में आएगी पारदर्शिता, फाइलें लंबित होने पर कर्मियों की तय होगी जवाबदेही

लखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण में जल्द ही ई-ऑफिस प्रणाली लागू होगी। इसके अंतर्गत प्राधिकरण के सभी अनुभागों की नई-पुरानी पत्रावलियां ई-ऑफिस पोर्टल पर अपलोड की जाएंगी। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अक्षय त्रिपाठी ने मंगलवार को अधिकारियों के साथ बैठक करके इस सम्बंध में निर्देश जारी किए। उपाध्यक्ष के इस कदम से विभागीय कार्यों में पारदर्शिता आएगी और फाइलें लंबित होने पर कर्मचारियों की जवाबदेही तय हो सकेगी।

 

उपाध्यक्ष कार्यालय में हुई इस बैठक में सचिव पवन कुमार गंगवार और राज्य सूचना अधिकारी, एन.आई.सी इफ्तिखार अहमद कुरैशी की उपस्थिति में ई-ऑफिस प्रणाली को शीघ्र लागू किए जाने के सम्बंध में चर्चा की गई। इसमें तय हुआ कि प्रथम चरण में प्राधिकरण के सभी अनुभागों में बनने वाली नई पत्रावलियां ई-ऑफिस पोर्टल के माध्यम से बनाई जाएंगी।

 

वहीं, दूसरे चरण में मौजूदा समय में प्रचलित फाइलों को इस पोर्टल के अंतर्गत लाने का कार्य किया जाएगा। इसके बाद तीसरे चरण के कार्य में पुरानी पत्रावलियों को ई-ऑफिस पोर्टल पर लिया जाएगा। बैठक में प्राधिकरण के प्रोग्रामर एनालिस्ट राघवेन्द्र कुमार मिश्रा ने बताया कि ई-ऑफिस प्रणाली की शुरुआत करने के लिए करीब 500 यूजर आईडी की जरूरत होगी। इसमें हर 50 कर्मचारी पर एक मास्टर ट्रेनर की आवश्यकता होगी, जिसको एन.आई.सी द्वारा प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। इसके अलावा एक एडमिन की जरूरत होगी, जोकि Linux और Java में दक्ष हो।

 

इस क्रम में प्राधिकरण के विशेष कार्याधिकारी देवांश त्रिवेदी द्वारा बताया गया कि ई-ऑफिस सॉफ्टवेयर की होस्टिंग के लिए एन.आई.सी के सर्वर पर स्पेस उपलब्ध नहीं है। अत: इसे स्टेट डाटा सेंटर पर अथवा केन्द्र/राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त स्पेस प्रोवाइडर (क्लाउड) पर होस्ट किया जाएगा। उन्होंने बताया कि ई-ऑफिस प्रणाली के तहत सभी 500 यूजर्स के ई-सिग्नेचर, डी.एस.टी (डिजिटली साइन्ड टेक्सट) और एन.आई.सी कॉरपोरेट मेल आईडी बनेगा।

 

बैठक के अंत में उपाध्यक्ष अक्षय त्रिपाठी ने कहा कि ई-ऑफिस प्रणाली लागू होने से सारा काम पेपरलेस हो जाएगा और सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज डिजिटल रिकॉर्ड में रहेंगे। इससे फाइलों के गायब होने या नष्ट होने की संभावना नहीं रहेगी। वहीं, इस प्रणाली के अंतर्गत यह भी पता चल सकेगा कि कौन सी फाइल-किस पटल पर-कितने दिन लंबित रही।

 

इससे कार्यों को लंबित रखने वाले कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय हो सकेगी और लोगों को अपना काम कराने के लिए विभाग के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। उपाध्यक्ष ने अधिकारियों को ई-ऑफिस की वेबसाइट से सम्बंधित जरूरी व्यवस्था कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एन.आई.सी द्वारा प्राधिकरण के स्तर पर जो भी वांछित कार्यवाही बताई जाएगी, उसे तुरंत पूरा करा लिया जाए। वह जल्द ही इस सम्बंध में विभागीय बैठक करके कार्यों की समीक्षा करेंगे।

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