वाराणसी – लहरतारा झील का वास्तविक कायाकल्प #Actual Rejuvenation of Lahartara Lake

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रोहित सेठ

वाराणसी:- 18 और 19 नवंबर, 2021 को पुराने कबीर मठ, लहरतारा, काशी में वाराणसी शहर में जल जागरूकता और जलप्रचुरता के निर्माण तथा लहरतारा जलाशय के पुनरोद्धार हेतु परियोजना की उद्घाटन संगोष्ठी का शुभारंभ किया गया | उत्सव व परियोजना के आयोजक थे एनओसी फाउंडेशन, दिल्ली और एनओसी एंड रिसर्च, काशी, जबकि वैदिक सृजन एलएलपी, दिल्ली आर्द्रभूमि (वेटलैंड्स) वजलाशयों (वाटरबॉडीज) के मूल पारिस्थितिक तन्त्र के पुनरुत्थान हेतु काउनोमिक्स प्रौद्योगिकी आविष्कारकजो इस परियोजना में प्रौद्योगिकी भागीदार है जिसके माध्यम से बिना किसी रसायन मशीन अथवा जैविक हस्तक्षेप के लहरतारा झील का पारिस्थितिक कायाकल्प संभव होगा |

लहरतारा झील कायाकल्प परियोजना की प्रगति की समीक्षा के लिए य़ह दूसरा कार्यक्रम परियोजना उद्घाटन संगोष्ठी के ठीक एक महीने बाद 18 दिसंबर, 2021को पुराने कबीर मठ, लहरतारा में आयोजित किया गया था। यह आयोजन श्री अनुपम ,क्षेत्रीय संगठन मंत्री, भारतीय मजदूर संघ (यूपी, उत्तरांचल, दिल्ली और नेपाल )की अध्यक्षता में हुआ। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, क्षेत्रीय कार्यालय, वाराणसी द्वारा पूर्व उपचार और उपचार के बाद के जल प्रतिदर्श परीक्षण की विस्तृत रिपोर्ट, माप और निगरानी के दौरान बैठक के दौरान सार्वजनिक की गई और एक आमूलचूल परिवर्तन जल की गुणवत्ता में परिलक्षित हुआ।

धुलित ऑक्सीजन स्तर में 100% से अधिक सुधार के साथ, इतिहास में पहली बार झील के पानी में घुलित ऑक्सीजन का स्तर माँ गंगा के जल से भी अधिक पाया गया है। फिकल कॉलीफॉर्म (सूक्ष्मजीवी) के स्तर में 90% की भारी गिरावट, जल स्वच्छता व शुचिता के सुधार को दर्शाती है। आसपास के लहरतारा क्षेत्र निवासियों ने इलाज की गुणवत्ता की पुष्टि करते हुए जल जनित दुर्गंध में प्रचुर गिरावट और मच्छरों की आबादी में भारी विघटन को अनुभव भी साझा किया।

“यही झील का वास्तविक जीर्णोद्धार एवम्-कायाकल्प है पुराने कबीर मठ के महंत गोविंद दास जी ने कहा की काउनोमिक्स सबसे सतत, व्यावहारिक, समग्र और सिद्ध तकनीक है, जिसे स्वदेशी रूप से वैदिक विज्ञान और भारतीय शास्त्रों के आधार पर विकसित किया गया है। इसे छत्तीसगढ़ तेलंगाना, मध्य प्रदेश, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश राज्यों में फैली कई परियोजनाओं में सफलतापूर्वक कार्यान्वित किया जा चुका है |

उत्तर प्रदेश में इस तकनीक द्वारा अयोध्या तथा मुरादाबाद में विभिन्न परियोजनाओं को मूर्त रूप दिया जा चुका है। इन्हें जलशक्ति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वाटर हीरो” के रूप में सम्मानित किया जा चुका है,टेड का अमेरिकी (अंतर्राष्ट्रीय) मंच द्वारा इस तकनीक को “प्रचारयोग्य विचार के रूप सम्मानित किया गया है, और स्पेनिश मार्ट वाटर पत्रिका द्वारा वैश्विक स्तर पर तृतीय पायदान के लेखक के रूप मे मान्यता दी गयी है़ ||

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