विहंगम योग संत समाज के 98वें वार्षिकोत्सव की तैयारियाँ पूर्ण श्रद्धालुओं का उमड़ा जन शैलाब

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चौबेपुर से विरेन्द्र प्रताप उपाध्याय की रिपोर्ट

 

वाराणसी चौबेपुर अध्यात्म हमारे जीवन की अपरिहार्य आवश्यकता है। इसके द्वारा हमारे जीवन का संपूर्ण विकास होता है। हम इस शरीर में हैं, हम इस संसार में है, जिंदगी बीत रही है हमारी और जिंदगी जीने में ही सारी जिंदगी बीत जाती है और जिंदगी है क्या, जीवन क्यों मिला है, इसका कितना, कहाँ, किस हद तक हमें बोध हो पाता है।

उपरोक्त बातें विहंगम योग के संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने स्वर्वेद महामंदिर धाम उमरहां में आयोजित विहंगम योग संत समाज के 98वें वार्षिकोत्सव एवं 5101 कुण्डीय विश्व शांति वैदिक महायज्ञ के प्रथम दिवस में उद्घाटन सत्र पर उपस्थित हजारों भक्तों को संबोधित करते हुए व्यक्त किया।

महाराज श्री ने भक्तों को बताया कि हमारा यह मानव जीवन अनमोल है, ईश्वर का महान प्रसाद है, यूँ ही नहीं मिला है और हम यूँ ही नहीं गँवा सकते। हमारे भीतर अनन्त की शक्ति है, ईश्वर ही हमारे भीतर बैठे हैं, हमारे अंदर ज्ञान का अनंत प्रकाश है। आवश्यकता है सद्गुरु युक्ति की , जिसके द्वारा हमारा जीवन निखर जाए, संवर जाए, इसीलिए सत्संग है और इसीलिए अध्यात्म की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि भारत आध्यात्मिक देश रहा है, अध्यात्म से ही हमारी पहचान संपूर्ण विश्व में है, इसी आध्यात्मिक ज्ञान की धारा को विहंगम योग के प्रणेता अनन्त श्री सदगुरु सदाफल देव जी भगवान ने अपनी आत्मा में धारण किया और संपूर्ण विश्व की मानवता के कल्याण के लिए उसे स्वर्वेद में अभिव्यक्त कर दिया। आध्यात्मिक जीवन ही श्रेष्ठ जीवन है। विहंगम योग विशुद्ध आध्यात्मिक मार्ग है। विहंगम योग से हम संसार के समस्त कर्तव्यों का पालन करते हुए सांसारिक कष्टों से ऊपर उठ जाते हैं। जीवन में स्वास्थ्य, सुख और शान्ति की त्रिवेणी को प्राप्त कर लेते हैं।

संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज की दिव्यवाणी स्वर्वेद कथामृत के रूप में लगभग ढाई घंटे तक प्रवाहित होती रही। स्वर्वेद के दोहों की संगीतमय प्रस्तुति से सभी स्रोता मंत्र मुग्ध हो उठे। संत श्री ने ओजस्वी वाणी में ब्रह्मविद्या विहंगम योग के सैद्धांतिक पक्ष को प्रकाशित करते हुए स्वर्वेद की अजस्र ज्ञान गंगा को प्रवाहित कर दिया।

इसके पूर्व सायं 5 बजे विहंगम योग समारोह का विधिवत व भव्य उद्घाटन संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज के सान्निध्य में ‘अ ‘ अंकित श्वेत ध्वजारोहण से हुआ।
आज 14 दिसंबर को प्रातः 6 बजे से 8 बजे तक आसन- प्राणायाम एवं ध्यान का विशेष सत्र संचालित होगा, जिसमें आश्रम के कुशल प्रशिक्षकों द्वारा शारीरिक एवं मानसिक आरोग्यता के निमित्त निःशुल्क आसन- प्राणायाम एवं ध्यान का अभ्यास आगत श्रद्धालुओं को कराया जायेगा।
दोपहर 1 बजे भारत के यशश्वी प्रधान मंत्री माननीय श्री नरेन्द्र भाई मोदी जी का शुभागमन स्वर्वेद महामंदिर धाम पर होगा। आपके साथ उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्य नाथ जी, माननीया राज्यपाल उत्तर प्रदेश श्रीमती आनन्दी बेन पटेल, श्री महेन्द्र नाथ पाण्डेय ( भारी उद्योग मंत्री, भारत सरकार) एवं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्री स्वतंत्र देव सिंह जी भी उपस्थित रहेंगे।
बताते चलें की माननीय प्रधान मंत्री महोदय सर्व प्रथम हेलीकाप्टर द्वारा प्रायोजित हेलीपैड पर दोपहर में 1 बजे उतरेंगे। तत्पश्चात वे स्वर्वेद महामंदिर धाम पर जायेंगे। लगभग 20 मिनट तक सप्त तलीय महामंदिर कोरिडोर में भ्रमण करने के पश्चात् वे सभा स्थल पर जायेंगे और वहां उपस्थित विहंगम योग के लाखों अनुयायियों को संबोधित करेंगे। लगभग डेढ़ घंटे तक माननीय प्रधानमंत्री महोदय विहंगम योग के इस महापर्व में उपस्थित रहेंगे।

उत्तर प्रदेश कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर. पंकज त्रिपाठी सहित अन्य ने किया निरीक्षण

इस आध्यात्मिक समारोह में भेदिक भजनों के साथ सुपुज्य संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज के श्रीमुख से सर्व हितकारी दिव्यवाणी, (स्वर्वेद कथामृत) एवं परम पूज्य सद्गुरु स्वतन्त्र देव जी महाराज की अमृतवाणी की पावन ज्ञान गंगा प्रवाहित होगी, जिसमें आगत भक्त शिष्य गोते लगायेंगे।
13 दिसम्बर के प्रातः काल से ही हांथों में अ अंकित श्वेत ध्वजा लिए तथा सद्गुरु देव का पावन जयघोष करते हुए लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमरहा में आयोजित होने वाले विहंगम योग के महा कुम्भ में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के निमित्त पहुँच रहे हैं।
इस आयोजन में प्रतिदिन निःशुल्क योग, आयुर्वेद, पंचगव्य, होम्योपैथ आदि चिकित्सा पद्धतियों द्वारा कुशल चिकित्सकों के निर्देशन में रोगियों को चिकित्सा परामर्श भी दिया जा रहा है।
दिनांक 15 दिसंबर को प्रातः 6 बजे से 8 बजे तक निशुल्क आसन- प्राणायाम एवं ध्यान का सत्र संचालित होगा।
प्रातः 10 बजे से 5101 कुण्डीय विश्व शांति वैदिक महा यज्ञ का भव्य आयोजन होगा।
सायं 5 बजे से आध्यात्मिक भेदिक भजनों के साथ ही साथ संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज के श्रीमुख से दिव्यवाणी ( स्वर्वेद कथामृत) एवं परम पूज्य सद्गुरु आचार्य श्री स्वतंत्र देव जी महाराज की अमृतवाणी की ज्ञान गंगा प्रवाहित होगी।

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