“जब देश सोता है, वर्दी जागती है — पुलिसकर्मी: एक अदृश्य सुरक्षा कवच”

“जब देश सोता है, वर्दी जागती है — पुलिसकर्मी: एक अदृश्य सुरक्षा कवच”
✍️ पत्रकार: निशांत सिंह की विशेष रिपोर्ट
जब देश त्योहारों की रंगत में सराबोर होता है,
जब घरों में मिठाइयाँ, दीपक और बच्चों की हँसी गूंजती है,
तब कुछ चेहरे ऐसे भी होते हैं जो न परिवार के पास होते हैं, न त्योहार के पास —
वे होते हैं हमारी सुरक्षा की पहली दीवार पर — हमारे पुलिसकर्मी।
ड्यूटी नहीं, यह तो सेवा है
कीनाराम बाबा जन्मस्थली जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल पर जब लाखों की भीड़ उमड़ती है, तो सुरक्षा का भार कुछ कंधों पर आ टिकता है — और वो हैं उत्तर प्रदेश पुलिस के निडर जवान।
12 घंटे की कड़ी ड्यूटी, भीड़भाड़ में एकाग्रता, हर पल सतर्कता — और भोजन?
सिर्फ चार पूरियां और सूखी भुजिया।
ना थकावट की शिकायत, ना हालात से गिला — क्योंकि इन्हें मालूम है, “हम हैं, तो समाज महफूज़ है।”
हर त्यौहार पर एक अदृश्य बलिदान
जब पुलिसकर्मी अपने परिवार से दूर फोन पर वीडियो कॉल कर के अपने बच्चों को “दीवाली मुबारक” कहते हैं, उस समय भी उनकी आँखें हर अजनबी चेहरे पर सतर्क निगाहें रखे होती हैं।
त्योहार का जश्न नहीं, दूसरों के त्योहार की सुरक्षा ही उनका त्योहार बन जाती है।
वर्दी – सिर्फ कानून की नहीं, करुणा की भी पहचान है
यह वही पुलिस है जो लावारिस बच्चों को उनके माता-पिता तक पहुंचाती है,
जो रात के अंधेरे में बुजुर्गों को घर छोड़ती है,
जो ट्रैफिक में फंसी एम्बुलेंस को रास्ता दिलवाने के लिए दौड़ पड़ती है।
तो क्या हम इस सेवा को सिर्फ एक “सरकारी नौकरी” कह सकते हैं?
प्रशंसा कीजिए – ये केवल अधिकार नहीं, कर्तव्य भी है
हर पुलिसकर्मी पर सवाल उठाने से पहले हमें एक बार रुककर सोचना चाहिए –
क्या हमने कभी उन्हें धन्यवाद कहा है?
क्या हमने कभी एक गिलास पानी या मुस्कान से उनका दिन आसान किया है?
Hind24tv की अपील:
👉 हर त्योहार पर, हर मेले में, हर आपदा में –
पुलिसकर्मी हमारा सबसे मजबूत सहारा हैं।
👉 ये वो लोग हैं जो हमारे कल को बचाने के लिए अपना आज कुर्बान कर देते हैं।
👉 आइए, इस त्यौहार सिर्फ अपने परिवार को नहीं,
उस वर्दी को भी सलाम करें जो न थकती है, न झुकती है।

💙 “जिनके त्याग से हमारा त्योहार सुरक्षित होता है, उन्हें भी एक धन्यवाद ज़रूरी है – सलाम है पुलिस को!”