परिवारिक विवाद में बंद हुई कास कार्पेट यार्न डायर्स कम्पनी, सैकड़ों मजदूर भुखमरी के कगार पर — बकाया मजदूरी को लेकर प्रदर्शन, 24 घंटे में भुगतान न होने पर अनशन की चेतावनी
जौनपुर। रामपुर थाना क्षेत्र के औद्योगिक क्षेत्र सिधवन स्थित कास कार्पेट यार्न डायर्स कम्पनी परिवारिक विवाद के चलते अचानक बंद हो जाने से सैकड़ों मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। मजदूरों का आरोप है कि कम्पनी प्रबंधन ने बिना किसी पूर्व नोटिस के 1 फरवरी से फैक्ट्री बंद कर दी, जिससे वे भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं।

मजदूरों के अनुसार कम्पनी चार सगे भाइयों की पार्टनरशिप में संचालित होती थी। आपसी विवाद बढ़ने के बाद प्रबंधन ने कामकाज पूरी तरह ठप कर दिया और मजदूरों को काम से बाहर कर दिया। इतना ही नहीं, कई मजदूरों की दो महीने की बकाया मजदूरी भी अब तक नहीं दी गई है।
इसको लेकर दर्जनों मजदूर शुक्रवार दोपहर लगभग 2 बजे रामपुर थाने पहुंचे और थाना प्रभारी को लिखित तहरीर देकर मजदूरी दिलाने तथा बिना नोटिस कम्पनी बंद करने के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
थाना प्रभारी विनोद कुमार ने बताया कि मजदूरों की तहरीर प्राप्त हुई है और मामले की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।

मजदूर रंजीत सिंह ने बताया कि “हम लोगों को बिना किसी नोटिस के कम्पनी से बाहर कर दिया गया। दो महीने की सैलरी भी नहीं मिली है। हमारे बच्चे भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। अगर 24 घंटे के अंदर मजदूरी नहीं मिली तो हम लोग अनशन करने को मजबूर होंगे।”
प्रदर्शन करने वालों में प्रमुख रूप से रंजीत सिंह, राजू दुबे, रमेश चंद तिवारी, रामू ठाकुर, शिशिर सिंह, रवि सिंह, असरफ अली, रेहान, मुस्तफा, तारीख, सतीश सिंह, सियाराम पाल, आनंद सिंह, श्याम साहू, आशीष विश्वकर्मा, देवी दुबे, विकास शुक्ला, जगरनाथ, राकेश, राजकुमार, परमेन्द्र, नीबूलाल, धीरज, दिनेश सरोज, राजेश सरोज, शशिप्रकाश सिंह, झंझट, सिंगेसर पासवान, अनिल सदा, नन्दलाल यादव, राजेश नारायण, श्रवन ठाकुर उर्फ रामू, हीरालाल पासवान, संजय, सूरज ठाकुर सहित सैकड़ों मजदूर शामिल रहे।
वहीं कम्पनी के प्रोपाइटर राजू जायसवाल ने बताया कि “हम चारों भाई पार्टनर हैं। आपसी विवाद के कारण कम्पनी बंद हुई है। मजदूरों का जो भी बकाया है, भुगतान किया जाना है, लेकिन पार्टनरों के बीच विवाद के चलते भुगतान में दिक्कत आ रही है।”
मामले को लेकर मजदूरों में भारी आक्रोश है। यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन तेज होने की संभावना जताई जा रही है।


