बाल विवाह रोकथाम को लेकर रामपुर थाना परिसर में जागरूकता बैठक
बाल विवाह संज्ञेय अपराध, प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से शामिल सभी पर होगी कड़ी कार्रवाई — सीओ मड़ियाहूं परमानंद कुशवाहा
रामपुर,जौनपुर। बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जनपद में बाल विवाह की रोकथाम एवं जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से शुक्रवार को रामपुर थाना परिसर में एक विस्तृत जागरूकता बैठक का आयोजन किया गया। कार्यक्रम जिला प्रशासन एवं पुलिस विभाग जौनपुर के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ, जिसमें विवाह सेवा प्रदाता, सामुदायिक स्वयंसेवक, मैरिज हॉल संचालक, डीजे संचालकों सहित नगर एवं ग्रामीण क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों ने सहभागिता की।

बैठक को संबोधित करते हुए क्षेत्राधिकारी मड़ियाहूं परमानंद कुशवाहा ने बाल विवाह को दंडनीय एवं संज्ञेय अपराध बताते हुए कहा कि इसमें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल सभी व्यक्तियों—अभिभावक, पंडित, काजी, मैरिज हॉल संचालक, बैंड-डीजे संचालक अथवा अन्य सहयोगी—सभी के विरुद्ध कठोर विधिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि बाल विवाह जैसी कुप्रथा को समाप्त करना प्रशासन की प्राथमिकता में है और इसमें समाज के प्रत्येक वर्ग का सहयोग आवश्यक है।

इस दौरान सीओ परमानंद कुशवाहा ने उपस्थित सभी लोगों को बाल विवाह न कराने और न होने देने की शपथ भी दिलाई। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि वे अपने-अपने क्षेत्र में बाल विवाह रोकथाम के प्रहरी बनें तथा किसी भी संदिग्ध बाल विवाह की सूचना तत्काल पुलिस व प्रशासन को दें।

मानव संसाधन एवं महिला विकास संस्थान, लहरतारा वाराणसी के प्रतिनिधि विजय कुमार ने बाल विवाह को गंभीर सामाजिक कुरीति बताते हुए इसके दुष्परिणामों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बाल विवाह से बालिकाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा एवं मानसिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि बाल विवाह एवं पर्दा प्रथा का प्रचलन मुगलकाल में बढ़ा, जिसका समाज सुधारक राजा राममोहन राय ने कड़ा विरोध किया। समय-समय पर इसके विरुद्ध कानून बनाए गए हैं।

उन्होंने बताया कि वर्तमान कानून के अनुसार विवाह हेतु लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष तथा लड़के की 21 वर्ष निर्धारित है। कहीं भी बाल विवाह की सूचना मिलने पर तत्काल पुलिस सेवा 112 या चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर कॉल कर इसे रोका जा सकता है।
प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार ने उपस्थित जनों को जागरूक करते हुए बाल विवाह न होने देने का संकल्प दिलाया तथा कहा कि समाज की सामूहिक जागरूकता से ही इस कुप्रथा पर प्रभावी रोक संभव है। कार्यक्रम के दौरान जागरूकता हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया, जिसमें लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।

कार्यक्रम में जमालापुर चौकी प्रभारी रामाश्रय कुशवाहा, उपनिरीक्षक मंजीत कुमार, उपनिरीक्षक संतोष सिंह एवं वरिष्ठ उपनिरीक्षक बाबू राम बिंद ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए बाल विवाह निषेध अधिनियम से जुड़े कानूनी प्रावधानों एवं दंडात्मक कार्यवाहियों की जानकारी दी।
इस अवसर पर कार्यकर्ता विजय कुमार, सुरेश कुमार, रामआसरे, गूंजा, सीमा सहित सकरा गांव के बनवासी महिला-पुरुष बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कोटिगांव, सपही, निस्फी तथा रामपुर नगर पंचायत क्षेत्र के सीबीसी लीडर्स एवं स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई।
बैठक के अंत में प्रशासन ने सभी से अपील की कि वे बाल विवाह मुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं और किसी भी बाल विवाह की सूचना तत्काल प्रशासन को देकर इस सामाजिक कुरीति के उन्मूलन में सहयोग करें।


