भदोही जीआरपी का हेडकांस्टेबल निकला ‘जिम गैंग’ का सरगना, अश्लील वीडियो व मतांतरण रैकेट का खुलासा
मीरजापुर। युवतियों के अश्लील वीडियो बनाने, ब्लैकमेलिंग और मतांतरण जैसे संगीन अपराधों में लिप्त एक संगठित गिरोह का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। इस गिरोह का सरगना कोई और नहीं, बल्कि जीआरपी में तैनात हेडकांस्टेबल इरशाद खान निकला है, जिसकी तैनाती भदोही जिले के माधोसिंह रेलवे स्टेशन पर थी। पुलिस कार्रवाई में उसके साथी फरीद अहमद सहित कुल छह आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
जिम की आड़ में अपराध का नेटवर्क
जांच में सामने आया है कि इरशाद खान अपने साथी फरीद अहमद के साथ मिलकर “जिम गैंग” का संचालन कर रहा था। इस गैंग के जरिए जिम में आने वाली युवतियों और महिलाओं को निशाना बनाया जाता था। पहले उनके अश्लील वीडियो बनाए जाते, फिर उन्हीं वीडियो के आधार पर उन्हें ब्लैकमेल कर पैसों की वसूली की जाती थी। पुलिस के अनुसार अब तक 25 से अधिक युवतियों व महिलाओं के अश्लील वीडियो बनाए जा चुके थे।
मुठभेड़ में गिरफ्तारी
गुरुवार की भोर संयुक्त पुलिस टीम ने देहात कोतवाली क्षेत्र के खड़ंजा फाल के पास मुठभेड़ के दौरान फरीद अहमद को गिरफ्तार किया। मुठभेड़ में वह घायल हो गया, जिसे इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। उसके पास से एक 315 बोर का तमंचा, कारतूस और मोबाइल फोन बरामद हुआ है।
वहीं गिरोह के सरगना हेडकांस्टेबल इरशाद खान को देहात कोतवाली क्षेत्र के करनपुर पहाड़ी के पास से गिरफ्तार किया गया। उसके पास से भी एक मोबाइल फोन बरामद हुआ है, जिसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।
आरोपी की पहचान
पुलिस के अनुसार इरशाद खान मूल रूप से पारा थाना गमहर, जिला गाजीपुर का निवासी है और वर्तमान में माधोसिंह रेलवे स्टेशन पर जीआरपी में तैनात था। फरीद अहमद शहर कोतवाली क्षेत्र के पक्की सराय मोहल्ले का रहने वाला बताया गया है।
पुलिस का बयान
इस पूरे मामले का खुलासा करते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सोमेन बर्मा ने पुलिस लाइन में प्रेस वार्ता कर बताया कि यह गिरोह लंबे समय से युवतियों को निशाना बना रहा था। अब तक छह आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है। गिरोह से जुड़े अन्य स्थानों और संपर्कों की भी जांच की जा रही है।
आगे और खुलासों की संभावना
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह की गतिविधियां सिर्फ एक जिले तक सीमित नहीं हो सकतीं। अन्य जिलों और राज्यों में भी इनके नेटवर्क की जांच की जा रही है। मोबाइल फोन और डिजिटल सबूतों की फॉरेंसिक जांच के बाद कई और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
यह मामला न सिर्फ महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर प्रश्न खड़ा करता है, बल्कि वर्दीधारी कर्मी की संलिप्तता ने पुलिस व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जांच में और कितने चेहरे बेनकाब होते हैं और इस पूरे नेटवर्क की जड़ें कहां तक फैली हुई हैं।



