शिक्षा विभाग में सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा : यूपी में ‘अनामिका शुक्ला’ नाम से चल रहा था करोड़ों का खेल,

🟥 टॉप स्टोरी | शिक्षा में सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा
यूपी में ‘अनामिका शुक्ला’ नाम से चल रहा था करोड़ों का खेल, 25 जिलों में फर्जी नियुक्ति; गोंडा से खुला राज, BSA सहित 8 पर केस दर्ज
📍 स्थान: गोंडा, उत्तर प्रदेश
शिक्षा विभाग में हिला देने वाला फर्जीवाड़ा उजागर
उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग में वर्षों से चल रहा एक गंभीर फर्जीवाड़ा अब कानून के शिकंजे में आ गया है। गोंडा जिले से सामने आए ‘अनामिका शुक्ला घोटाले’ ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया है।
❗ एक ही नाम, 25 नियुक्तियां — और किसी को पता तक नहीं!
बिना किसी सत्यापन और नियुक्ति प्रक्रिया के, “अनामिका शुक्ला” नाम से 25 अलग-अलग जिलों में नियुक्तियां की गईं। असल में, ये सभी शिक्षक फर्जी थे और हर महीने लाखों रुपये का वेतन ले रहे थे।
2017 से 2020 तक करोड़ों का गबन इसी एक नाम के तहत चलता रहा।
कैसे खुला मामला?
2020 में असली अनामिका शुक्ला जब खुद शिक्षा विभाग पहुंचीं, तो पता चला कि उनके नाम का दुरुपयोग कर बेरोजगार युवाओं को फर्जी तरीके से नौकरी दिलाई गई थी।
SIT जांच में सामने आया कि एक संगठित गिरोह शिक्षा विभाग के भीतर ही डिग्रियों का गलत उपयोग कर फर्जी नियुक्ति कर रहा था।
अब BSA समेत 8 लोगों पर FIR
अदालत के आदेश पर गोंडा की नगर कोतवाली पुलिस ने इन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है:
- अतुल कुमार तिवारी (BSA)
- सिद्धार्थ दीक्षित (तत्कालीन वित्त एवं लेखा अधिकारी)
- सुधीर सिंह (पटल लिपिक)
- अनुपम पांडेय (कर्मचारी)
- अनामिका शुक्ला (फर्जी शिक्षिका)
- दिग्विजयनाथ पांडेय (विद्यालय प्रबंधक)
- विद्यालय के प्रधानाचार्य
- एक अज्ञात व्यक्ति
ASP का बयान:
“कोर्ट के आदेश पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। SIT भी सक्रिय है। जल्द ही और खुलासे होंगे।”
— मनोज कुमार रावत, अपर पुलिस अधीक्षक (पूर्वी)
गिरोह का तरीका:
- बेरोजगार युवाओं की डिग्रियां जुटाना
- एक ही नाम (अनामिका शुक्ला) से फर्जी नियुक्ति पत्र बनवाना
- स्कूल प्रबंधकों और अधिकारियों की मिलीभगत
- अलग-अलग जिलों से वेतन निकासी
- कोई वेरिफिकेशन नहीं, सब कुछ कागज़ों पर सेट
SIT जांच जारी है, और भी खुलासे संभव
राज्य सरकार द्वारा गठित SIT अभी भी जांच कर रही है। सूत्रों की मानें तो इस गिरोह के राज्य के कई और जिलों में भी लिंक हैं, और कई फर्जी नामों से नियुक्तियों का शक है।
Hind24TV की एक्सक्लूसिव राय:
यह मामला केवल एक फर्जीवाड़ा नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में गहराई तक फैले भ्रष्टाचार का प्रमाण है।
यदि इसे समय रहते नहीं रोका गया होता, तो यह पूरे सिस्टम को दीमक की तरह खोखला कर देता।