पति-पत्नी पर हमले के मामले में दो आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज ||

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रिपोर्ट – सन्तोष कुमार सिंह

वाराणसी :- पति पर जानलेवा हमला करने व पत्नी को मारपीटकर गम्भीर रूप से घायल करने के मामले में आरोपितो को राहत नहीं मिली। प्रभारी जिला जज राजेन्द्र प्रसाद त्रिपाठी की अदालत आरोपित अशोक यादव व मनोज यादव की जमानत अर्जी सुनवाई के बाद खारिज कर दी। अदालत में वादिनी की ओर से अधिवक्ता अनुज यादव, बृजपाल सिंह यादव व रेयाजुद्दीन उर्फ बंटी खान ने जमानत अर्जी का विरोध किया।

 

अभियोजन पक्ष के अनुसार पहड़िया, सारनाथ निवासिनी पूजा यादव ने 12 अक्टूबर 2021 को सारनाथ थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि पुरानी रंजिश को लेकर 10 अक्टूबर को शाम 7 बजे प्रार्थिनी के जेठ अशोक यादव, मनोज यादव व भतीजा दक्ष यादव के साथ तीन-चार लोग उसके घर पर चढ़ आये और उसके पति को जान से मारने की नीयत से रस्सी या तार से उसके पति का गला दबाने लगे। इस दौरान जब वह बीचबचाव करने पहुंची तो वे सभी अपनी पत्नियों के साथ उसपर हमला कर दिया। शोर सुनकर जब आसपास के लोग जुटने लगे तो सभी हमलावर उसके पति को मरा हुआ समझकर उसे वैसे ही छोड़कर वहां से भाग गए। बाद में आसपास के लोगों के प्रयास के बाद वह होश में आई और 112 नम्बर पर पर फोन किया और कुछ देर बाद एम्बुलेंस आने पर पति को उपचार के लिए कबीरचौरा अस्पताल में भर्ती कराया, जहां हालत गंभीर देख चिकित्सकों ने उन्हें बीएचयू ट्रामा सेंटर के लिए रेफर कर दिया गया।

 

अदालत में वादिनी के अधिवक्ता ने दलील दी कि पीड़ित मुकेश ने अपने बयान में अशोक यादव पर रस्सी से गला दबाने का आरोप लगाया है। उसके बचाव में अशोक की उंगली काटने का भी प्रयास किया था। पीड़ित के गले पर रस्सी से दबाने का घाव भी पाया गया है, जिसकी पुष्टि फ़ोटो से भी होती है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पीड़ित के गले पर लिगेचर मार्क पाया गया है। ऐसे में मामले ले तथ्यों एवं परिस्थितियों में अभियुक्तों के विरुद्ध आरोपित अपराध गंभीर है। ऐसे आरोपितों की जमानत का आधार पर्याप्त नही पाया जाता है। ऐसे में आरोपितों की जमानत अर्जी खारिज की जाती है।

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