सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: नसबंदी और टीकाकरण के बाद आवारा कुत्तों को छोड़ा जाएगा, पब्लिक फीडिंग पर रोक

 सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: नसबंदी और टीकाकरण के बाद आवारा कुत्तों को छोड़ा जाएगा, पब्लिक फीडिंग पर रोक

📍नई दिल्ली | 🗓️ 22 अगस्त 2025 | ✍️ रिपोर्ट — Hind24tv डिजिटल डेस्क

देशभर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनसे जुड़े हमलों को लेकर चल रही बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा और संतुलित फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि आवारा कुत्तों को पकड़कर स्थायी रूप से शेल्टर होम में रखना समाधान नहीं है। अब उन्हें नसबंदी और टीकाकरण के बाद दोबारा उसी स्थान पर छोड़ा जाएगा जहाँ से उन्हें पकड़ा गया था।

 क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?

सुप्रीम कोर्ट ने पहले दिए गए उस आदेश को संशोधित किया है जिसमें दिल्ली‑NCR से सभी आवारा कुत्तों को उठाकर स्थायी रूप से शेल्टर होम में रखने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने शुक्रवार को अपने नए आदेश में कहा:

“सभी आवारा कुत्तों को नसबंदी और रेबीज टीकाकरण के बाद उनके मूल स्थान पर छोड़ दिया जाए। केवल वे कुत्ते जो आक्रामक हैं या रेबीज से संक्रमित हैं, उन्हें शेल्टर में रखा जाए।”

 फैसले की प्रमुख बातें:

बिंदु विवरण
Sterilisation और Vaccination अनिवार्य सभी कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद ही छोड़ा जाएगा।
🚫 सार्वजनिक स्थानों पर खाना खिलाने पर रोक अब पार्कों, गलियों और सड़कों पर कुत्तों को खाना नहीं खिलाया जा सकेगा।
🟢 फीडिंग ज़ोन बनेंगे स्थानीय निकायों को खास फीडिंग ज़ोन बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
🔴 आक्रामक और बीमार कुत्ते शेल्टर में रेबीज से पीड़ित या हिंसक व्यवहार करने वाले कुत्तों को शेल्टर में ही रखा जाएगा।
🇮🇳 देशभर में लागू आदेश यह फैसला केवल दिल्ली नहीं, बल्कि पूरे भारत पर लागू होगा।
📑 सभी केस सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर अन्य राज्यों में चल रहे आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों को सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित किया जाएगा।

 क्या बोले पशु अधिकार कार्यकर्ता?

पशु अधिकार कार्यकर्ताओं और एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को “विज्ञान-आधारित और मानवीय दृष्टिकोण वाला” बताया है। मेनका गांधी समेत कई संगठनों ने इस आदेश का स्वागत किया है।
वहीं, पब्लिक फीडिंग पर रोक को लेकर कुछ कार्यकर्ताओं ने आशंका भी जताई है कि इससे कुत्तों की देखभाल बाधित हो सकती है।

⚖️ क्यों अहम है यह फैसला?

  • आवारा कुत्तों की संख्या और उनसे जुड़े हमले लंबे समय से चिंता का विषय रहे हैं।
  • अदालत ने अब इस मामले में एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए इंसानों की सुरक्षा और पशु कल्याण दोनों का ख्याल रखा है।
  • इससे पशु अधिकार और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक ठोस शुरुआत मानी जा रही है।

⏭️ आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और स्थानीय प्रशासन को 8 हफ्तों के भीतर सभी दिशा-निर्देशों को लागू करने और रिपोर्ट पेश करने का आदेश भी दिया है। इसके बाद कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई करेगी।

🔚 निष्कर्ष:
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश एक तरफ आवारा कुत्तों के कल्याण को सुनिश्चित करता है, वहीं दूसरी ओर आम नागरिकों की सुरक्षा का भी ध्यान रखता है। अब बारी प्रशासन की है कि वह कोर्ट के निर्देशों को ज़मीनी स्तर पर कैसे लागू करता है।

 

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