💔 जब प्रेम विवाह बना त्रासदी का कारण: क्या रिश्तों में संवाद की कमी खतरनाक मोड़ तक ले जाती है?
🖋 Hind24TV विशेष रिपोर्ट |
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद से आई एक दिल दहला देने वाली खबर ने न केवल क्षेत्र को, बल्कि पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। प्रेम विवाह से शुरू हुआ एक रिश्ता, कुछ ही वर्षों में दरकता चला गया और अंततः एक ऐसा खौफनाक मोड़ ले लिया, जिसकी कीमत तीन जिंदगियों ने चुकाई — जिनमें से एक तो महज़ डेढ़ साल का मासूम बच्चा था।
📍 घटना की पड़ताल: प्यार, झगड़ा और फिर मौत का दामन
नजीबाबाद की वेदविहार कॉलोनी के निवासी 31 वर्षीय बीएसएफ जवान राहुल ने करीब पांच साल पहले मनीषा से प्रेम विवाह किया था। शुरूआत में सब कुछ सामान्य था, लेकिन धीरे-धीरे वैवाहिक जीवन में दरारें आने लगीं।
19 अगस्त को किसी पारिवारिक विवाद के बाद मनीषा ने मीरापुर गंगा बैराज से छलांग लगा दी। चार दिन तक एनडीआरएफ की टीम तलाश करती रही, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
और फिर 23 अगस्त को, राहुल अपने डेढ़ वर्षीय बेटे प्रणव को गोद में लेकर उसी बैराज पर पहुँचा, CCTV फुटेज में पत्नी को छलांग लगाते देख हिल गया — और खुद भी बेटे के साथ गंगा की लहरों में समा गया।
😔 तीन जानें, एक गलती – क्या वक़्त रहते रोका जा सकता था यह हादसा?
इस दुखद घटना ने एक बार फिर कई गंभीर सवाल हमारे सामने खड़े कर दिए हैं:
🧠 मानसिक स्वास्थ्य: सबसे बड़ी चुप्पी
राहुल और मनीषा के रिश्ते में जो मनमुटाव था, वह काउंसलिंग या समझदारी से सुलझ सकता था। लेकिन समाज में आज भी “मैरिज काउंसलिंग” या “थैरेपी” को शर्मनाक समझा जाता है, और यही चुप्पी कई बार जिंदगी को मौत में बदल देती है।
🧩 क्या प्रेम विवाहों को समाज का सहयोग नहीं मिलता?
प्रेम विवाह करने वाले दंपत्तियों को अक्सर सामाजिक स्तर पर अकेलापन महसूस होता है। जब मतभेद आते हैं, तो समर्थन के बजाय ताने मिलते हैं। यदि समय पर परिवार या समाज ने साथ दिया होता, तो शायद तीनों की जान बच सकती थी।
🧍♂️ प्रशासन की लापरवाही या सीमाएं?
चार दिन पहले महिला द्वारा छलांग लगाए जाने के बावजूद, बैराज पर कोई कड़ी निगरानी या रेस्क्यू पॉइंट नहीं था। यह प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।
👶 और उस मासूम का क्या दोष था?
एक मासूम बच्चा, जो अभी बोलना भी ठीक से नहीं सीखा था, उसे भी इस त्रासदी में झोंक दिया गया। क्या माता-पिता को यह अधिकार है कि वे अपनी असफलता की कीमत अपनी संतान से वसूलें?
🙏 Hind24TV की समाज से अपील
रिश्तों में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन समाधान संवाद में है, आत्मघात में नहीं। जब भी कोई व्यक्ति मानसिक रूप से टूट रहा हो, तो मदद माँगना कमजोरी नहीं, साहस है।
➡️ यदि आप या आपके जानने वाले किसी मानसिक तनाव, पारिवारिक कलह या आत्महत्या जैसे विचारों से जूझ रहे हैं, तो तुरंत मदद लें।
📞 मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन:
टोल फ्री: 1800-599-0019 (केंद्र सरकार द्वारा संचालित)
या अपने नजदीकी चिकित्सक / थैरेपिस्ट से सम्पर्क करें।
🔚 समाज कब सीखेगा?
यह घटना न केवल एक खबर है, बल्कि एक आइना है — जिसमें हम सबको झांकना चाहिए। सवाल यह नहीं कि गलती किसकी थी, सवाल यह है कि क्या हम सबने मिलकर इस त्रासदी को टालने की कोशिश की थी?
रिश्ते निभाइए, संवाद करिए — क्योंकि एक पल की चुप्पी, ज़िंदगी भर का पछतावा बन सकती है।

