विधानसभा चुनाव से पहले यूपी में पंचायत चुनाव के संकेत, आरक्षित वर्ग को बड़ी राहत
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर लंबे समय से बनी असमंजस की स्थिति अब धीरे-धीरे साफ होती दिख रही है। राज्य के पंचायत राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने संकेत दिया है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले ही प्रदेश में पंचायत चुनाव कराए जाएंगे। उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीति और ग्रामीण स्तर पर हलचल तेज हो गई है।
मंत्री ओपी राजभर ने कहा कि जैसे ही SIR (विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण) की प्रक्रिया पूरी होगी, उसके बाद पंचायत चुनाव की चुनावी प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। राजनीतिक और प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, पंचायत चुनाव अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच कराए जा सकते हैं। हालांकि, अंतिम और आधिकारिक कार्यक्रम की घोषणा भारत निर्वाचन आयोग द्वारा ही की जाएगी।
आरक्षित वर्ग को बड़ी राहत
पंचायत चुनाव से पहले सरकार ने OBC, SC, ST समेत अन्य आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को बड़ी राहत दी है। इन वर्गों के प्रत्याशियों को सामान्य वर्ग की तुलना में नामांकन शुल्क और जमानत राशि में 50 प्रतिशत तक की छूट दी गई है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों की राजनीतिक भागीदारी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
आरक्षित वर्ग के लिए तय शुल्क
| पद | नामांकन शुल्क | जमानत राशि |
|---|---|---|
| ग्राम पंचायत सदस्य | ₹100 | ₹400 |
| ग्राम प्रधान | ₹300 | ₹1500 |
| क्षेत्र पंचायत सदस्य (BDC) | ₹300 | ₹1500 |
| जिला पंचायत सदस्य | ₹500 | ₹4000 |
| ब्लॉक प्रमुख | ₹1000 | ₹5000 |
| जिला पंचायत अध्यक्ष | ₹1500 | ₹12500 |
सामान्य वर्ग के लिए शुल्क
| पद | नामांकन शुल्क | जमानत राशि |
|---|---|---|
| ग्राम पंचायत सदस्य | ₹200 | ₹800 |
| ग्राम प्रधान / BDC | ₹600 | ₹3000 |
| जिला पंचायत सदस्य | ₹1000 | ₹8000 |
| ब्लॉक प्रमुख | ₹2000 | ₹10000 |
| जिला पंचायत अध्यक्ष | ₹3000 | ₹25000 |
क्या होता है नामांकन शुल्क और जमानत राशि?
नामांकन शुल्क वह राशि होती है जो उम्मीदवार को चुनाव लड़ने के लिए नामांकन के समय जमा करनी होती है। यह राशि वापस नहीं की जाती।
जमानत राशि एक प्रकार की सुरक्षा राशि होती है। यदि कोई उम्मीदवार कुल वैध मतों का निर्धारित न्यूनतम प्रतिशत (आमतौर पर 1/6 वोट) प्राप्त नहीं कर पाता, तो उसकी जमानत जब्त हो जाती है। पर्याप्त वोट मिलने या नामांकन वापस लेने की स्थिति में यह राशि लौटा दी जाती है।
राजनीतिक संकेत और आगे की तस्वीर
विधानसभा चुनाव से पहले पंचायत चुनाव कराए जाने के संकेतों को राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। आरक्षित वर्ग को दी गई आर्थिक राहत से बड़ी संख्या में नए और युवा प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतर सकते हैं। इससे न सिर्फ ग्राम पंचायतों में नेतृत्व का दायरा बढ़ेगा, बल्कि ग्रामीण राजनीति में नई ऊर्जा भी देखने को मिल सकती है।
अब प्रदेश की जनता, संभावित उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों की निगाहें चुनाव आयोग की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हुई हैं, जिससे पंचायत चुनाव की तस्वीर पूरी तरह साफ हो सके।


