जानिए पात्रा चॉल की दर्दभरी कहानियां, कहीं गहने गिरवी, किसी ने घर की आस में ली अंतिम सांस

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रहवासियों का कहना है
कि समझौते के अनुसार, डेवलपर को प्रोजेक्ट खत्म होने तक सभी 671 किरायदारों को हर महीने किराया देना था। साल 2014-15 तक किराया दिया गया।

शिवसेना सांसद संजय राउत के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के बाद एक बार फिर पात्रा चॉल का नाम चर्चा में है। फिलहाल, इस मामले में राउत को 4 अगस्त तक हिरासत में भेजा गया है। बहरहाल, ताजा घटनाक्रमों के साथ ही उन सैकड़ों लोगों का दर्द भी फिर हरा हो गया है, जो सिद्धार्थ नगर स्थित इस चॉल के विकास कार्य के चलते सालों से घर की बांट जोह रहे हैं।

 गोरेगांव के रहने वाले संजय नाईक को ‘पुनर्विकास’ होने के कारण पात्रा चॉल से अपना घर खाली करना पड़ा था। उस दौरान वादा किया गया था कि उन्हें तीन सालों के बाद घर वापस मिल जाएगा। वह कहते हैं, ‘प्रोजेक्ट में देरी हो रही है और हमें वादा किया हुआ किराया भी नहीं मिल रहा है। इस प्रोजेक्ट ने हमारी परेशानियां कई गुना बढ़ा दी हैं।’ हालांकि, उनकी तरह 671 किरायदारों की कहानियां भी ऐसी ही हैं।

फिलहाल, नाइक 6 सदस्यों के परिवार के साथ चॉल के पास ही किराये से रह रहे हैं। उनकी तरह कई लोगों का दावा है कि किराया चुकाने के लिए उन्हें अपने सोने के गहने गिरवी रखने पड़े। वह अपनी मासिक कमाई में से 20 हजार रुपये किराया देने के चलते परेशान हैं और से किराया देने की अपील कर रहे हैं।

क्या था  इनका मामला

671 किरायदारों ने साल 2008 में अपना घर महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी को सौंप दिया था। इसके बाद अथॉरिटी ने गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को किरायदारों के पुनर्वास और क्षेत्र के विकास के लिए कॉन्ट्रेक्ट दिया। किरायदारों और के बीच पात्रा चॉल के विकास को लेकर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

रहवासियों का कहना है कि समझौते के अनुसार, डेवलपर को प्रोजेक्ट खत्म होने तक सभी 671 किरायदारों को हर महीने किराया देना था। साल 2014-14 तक किराया दिया गया, लेकिन बाद में प्रोजेक्ट कथित घोटाले में फंस गया और 6 सालों के लिए अटक गया। इसके बाद में यह दोबारा शुरू हुआ है।

चॉल के किरायेदार नरेश सावंत

मुंबई में 1 के लिए एक व्यक्ति को कम से कम 20 हजार रुपये देने होते हैं। मध्यमवर्गीय होने के कारण कई किरायेदार इतना किराया नहीं दे सकते और इसलिए वह विरार, वसई, नालासोपारा, कल्याण, डोंबिविली और नवी मुंबई जैसे इलाकों में शिफ्ट हो गए हैं। कुछ अपने गांव भी लौट गए हैं और अपनी सभी उम्मीदें छोड़ दी हैं।’

 बताया गया कि संभावना है कि बीते दशक में अपने घर का सपना लिए कम से कम 90-145 लोगों की मौत भी हो चुकी है। उन्होंने कहा, ‘परिवारों को किराया मिले 6 साल हो गए हैं। हम उनसे से अनुरोध कर रहे हैं, लेकिन कुछ नहीं हुआ। जब तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने फरवरी 2021 में काम दोबारा शुरू कराया, तो राज्य सरकार ने घोषणा की थी कि मार्च से किराया मिलना शुरू हो जाएगा। अगस्त 2022 आ गई है और कोई किराया नहीं मिला है।’

राउत की गिरफ्तारी पर पात्रा चॉल को-ऑपरेटिंग

 अब सोसाइटी के अध्यक्ष राजेश दल्वी कहते हैं, ‘हमें किरायदार के तौर पर राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं है। हमें केवल किराये, घर और वादों की चिंता है, जो हमारे साथ समझौते में किया गया था। हमने 14 सालों में कई चीजों का सामना किया है। परिवारों ने बहुत मुश्किलों का सामना किया है।’

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