जौनपुर:अनमय के मदद को देवदूत वानर सेना ने चला अभियान, मदद की मिसाल पेश कर रहें है जौनपुर व मुंगराबादशाहपुर के युवा

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अनमय के मदद को देवदूत वानर सेना ने चला अभियान,

मदद की मिसाल पेश कर रहें है जौनपुर व मुंगराबादशाहपुर के युवा

संरक्षक अजीत प्रताप सिंह के नेतृत्व में देश-विदेश में चला मदद का अभियान

वानर सेना ने मात्र दस दिनों में अनमय मदद में जा चुका है 85 लाख रुपए..

अनमय की मदद के लिए चलाव होडिंग व स्टिकर अभियान

विक्की कुमार गुप्ता मुगरा बादशाहपुर जौनपुर। जनपद सुल्तानपुर का निवासी अनमय जो स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी से पीड़ित बच्चा के उपचार के लिए आज जनपद जौनपुर सहित मुंगराबादशाहपुर में पिछड़ा विभाग आयोग के डिप्टी डायरेक्टर व देवदूत वानर सेना के संरक्षक अजीत प्रताप सिंह के आवाहन पर युवाओं की एक टोली विकास तिवारी व शैलेंद्र साहू के‌ नेतृत्व में शहर के मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च, स्टेशन, बसअड्डे व सरकारी संस्थानों के अलावा कचहरी रोड व अन्य इलाकों में सार्वजनिक स्थान व सरकारी कार्यालयों के बाहर अनमय मदद के नाम का स्टीकर लगाकर क्राउड फंडिंग के माध्यम से मदद धनराशि जुटाने का अभियान चला रही है।


अनमय सिंह का इलाज कर रहीं सर गंगाराम अस्पताल की डॉ. वेरोनिका अरोरा ने बताया है कि एसएमए टाइप-1 (Spino Muscular Atrophy) बेहद दुर्लभ किस्म की बीमारी है। इसमें बच्चों के अंग धीरे-धीरे काम करना बंद कर देते हैं और उन्हें सांस लेने तक में बहुत परेशानी होने लगती है।

सात महीने के अनमय सिंह एसएमए टाइप-1 (SMA Type-1) नाम की बेहद दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे हैं। इस बीमारी में बच्चों के हाथ-पैर धीरे-धीरे काम करना बंद कर देते हैं और उन्हें सांस लेने में भी परेशानी होने लगती है। बाद में ये अपनी किसी भी जरूरत के लिए पूरी तरह दूसरों पर निर्भर हो जाते हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि अनमय की जान बचाई जा सकती है और वे भी किसी दूसरे सामान्य बच्चे की तरह जिंदगी जी सकते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें एक विशेष इंजेक्शन जल्द से जल्द लगवाना होगा। इस इंजेक्शन के एक डोज की कीमत 16 करोड़ रुपये है, जिसे चुकाना किसी भी निम्न मध्यम वर्गीय परिवार के लिए संभव नहीं है।

लिहाजा बच्चे की जान बचाने के लिए उनके माता-पिता क्राउड फंडिंग के जरिए मदद की गुहार लगा रहे हैं।विकास तिवारी ने बताया कि दुर्लभ बीमारी एसएमए टाइप-१ से पीड़ित बच्चों के अंग धीरे-धीरे काम करना बंद कर देते हैं और उन्हें सांस लेने तक में बहुत परेशानी होने लगती है।

यदि इन बच्चों को सही समय पर एक विशेष इंजेक्शन (AVXS-101 Onasemnogene Abeparvovec-xioi) दिया जा सके तो न केवल इनकी जिंदगी बचाई जा सकती है, बल्कि ये दूसरे बच्चों की तरह सामान्य जिंदगी भी जी सकते हैं।

लेकिन इसके लिए यह इंजेक्शन इन्हें जल्द से जल्द मिल जाना चाहिए। इस बीमारी से मुक्ति के लिए इस इंजेक्शन की एक डोज ही काफी होती है।यदि बच्चों को सही समय पर इंजेक्शन नहीं मिल पाता है तो बॉडी के न्यूरॉन्स धीरे-धीरे सूख जाते हैं। ये मस्तिष्क को संदेश भेजना बंद कर देते हैं, जिससे बच्चे को किसी बात का अनुभव नहीं होता। इससे उसकी तकलीफें बढ़ने लगती हैं।

अतुल सिंह ने कहा कि इंपैक्ट गुरू नाम की क्राउड फंडिंग वेबसाइट पर अनमय सिंह के लिए लोगों से मदद की गुहार लगाई जा रही है। लोग मदद कर भी रहे हैं, लेकिन इलाज के लिए आवश्यक रकम इतनी ज्यादा है कि इतना पैसा आसानी से जुटता नहीं दिख रहा है।

यही कारण है कि अनमय के माता पिता और सामाजिक संगठन सबसे मदद की अपील कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि लोग आगे आएंगे और अनमय नाम के बच्चे की जान बचाई जा सकेगी।

इसी क्रम में डॉ अब्बासी ने कहा कि यह इंजेक्शन भारत में नहीं बनाया जाता है। इसे विदेश से मंगवाना पड़ता है जिसकी अमेरिकन मुद्रा में लगभग 2.1 मिलियन डॉलर कीमत आती है। इस समय इसकी कीमत भारत में लगभग 16 करोड़ रुपये है।

इसके अलावा इसको आयात करने पर जीएसटी सहित कई टैक्स देने पड़ते हैं। इस प्रकार इसकी कीमत किसी भी परिवार की पहुंच से बाहर हो जाती है।

कई संगठनों ने सरकार से अपील की है कि इस तरह की दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं और इंजेक्शन टैक्स फ्री कर दिया जाना चाहिए। लेकिन अभी तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है।

उक्त अवसर पर प्रमुख रूप से डॉ अब्बासी, अतुल सिंह, विक्की कुमार गुप्ता (पत्रकार) शैलेन्द्र साहू, नीरज शुक्ला, तुषार श्रीवास्तव, अवनींद्र यादव, दिव्यप्रकाश सिंह, विक्की अग्रहरी, डॉ प्रभात विक्रम, आशीष सिंह बादल, कुलदीप यादव, रामबचन यादव, स्नेहिल, अभिषेक, सोनू , अभय, निर्भय इत्यादि रहे।

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