जौनपुर।गंगा दशहरा पावन पर्व पर राउर बाबा मेले में श्रद्धालुओं ने टेका मथ्था, मांगी मन्नतें सुरक्षा हेतु भारी संख्या में तैनात रही फोर्स

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गंगा दशहरा पावन पर्व पर राउर बाबा मेले में श्रद्धालुओं ने टेका मथ्था, मांगी मन्नतें

सुरक्षा हेतु भारी संख्या में तैनात रही फोर्स

जौनपुर।बक्शा थाना क्षेत्र के मई गांव स्थित ऐतिहासिक राउर बाबा मेले में गंगा दशहरा के पावन पर्व पर गुरुवार को करीब 50 हजार भक्तों ने सरोवर में स्नान कर मन्दिर में पूजन-अर्चन किया। रात्रि दो बजे से शुरू हुआ श्रद्धालुओं की भीड़ शाम तक चलता रहा।

उधर पूरे मंदिर परिसर से लेकर मेला क्षेत्र में जगह-जगह बैठे ओझा-सोखा अपने तन्त्र-मन्त्र का जाल फैलाये भुत-प्रेत से मुक्ति दिलाने का दावा करते देखे गये। मेले में शांति ब्यवस्था हेतु भारी संख्या में पुलिस के जवान मौजूद रहे।
जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर राष्ट्रीय राज्यमार्ग पर नौपेड़वा बाजार से उत्तर बक्शा थाना क्षेत्र के मई गांव में स्थित राउर बाबा का सिद्ध स्थल है। ऐतिहासिक राउर बाबा का गंगा दशहरा के इस वार्षिक मेले में देश के कोलकाता, गुजरात सहित विभिन्न प्रान्तों से आये हजारों श्रद्धालुओं ने बुधवार की रात्रि से ही मत्था टेक दर्शन पूजन शुरू कर दिया।

श्रद्धालु मेले में बड़े-बड़े पताके के साथ अन्न जौ के साथ जय-जयकारे लगाते हुए सरोवर की परिक्रमा कर समाधि स्थल का दर्शन किया। श्रद्धालुओं की धारणा है कि सच्चे मन से मांगी गयी हर मुराद मां अवश्य पूरा करती है।

भुत-प्रेत को मानने वाले श्रद्धालुओं का मानना है कि बाबा की समाधि स्थल पर आते ही सभी कष्ट कथित रूप से जहाँ दूर हो जाते है वही भूत-पिशाच जलकर भष्म हो जाते है। मेले के अंदर परिसर से लेकर सरोवर स्थल तक ओझा-सोखा का जमावड़ा लगा रहा। बाबा की समाधि स्थल पर लगने वाला यह मेला पुरे एक सप्ताह तक चलता रहता है।
ऐतिहासिक राउर बाबा समाधि के ऊपर पार्वती, सरस्वती की प्रतिमा है। समाधि के पीछे पत्नी सती भुनगा देवी की समाधि स्थल है। वही से सटे हनुमान जी की मूर्ति स्थापित है। बाबा की समाधि के बगल में पुत्र कृपाल दास व हरिश्चंद्र की समाधि बनी हुई है। जनश्रुति है कि भगवान राम द्वारा सभी तीर्थ स्थलो से लाये गये जल को सरोवर में डाला गया है।

इसलिए इसे रामगया भी कहते है। मान्यता है कि श्रद्धालु भुनगा माता की समाधी पर अपने मन की मनौती लिख ईंट का भार रख मनौती पूरा होने पर अगले वर्ष पहुँच भार उतारते है।

गंगा दशहरा ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष दशमी तिथि को हर वर्ष पड़ने वाले इस मंदिर के पुजारी पद पर ब्राह्मण की जगह गोसाई बिंद जाति का आधिपत्य है। भक्त मंदिर में चना का दाल, गुड़, पूड़ी व हलवा चढ़ाते है। मन्दिर कमेटी अध्यक्ष मनोज कुमार गोसाई, प्रबन्धक छोटेलाल गोसाई, लक्ष्मीकांत गोसाई, रायसाहब गोसाई, भानू प्रताप, प्यारेलाल, मंगला, प्रसाद, राम आदर्श, भीष्म कुमार, महन्थ रामनिरंजन गोसाई, चिंताहरण गोसाई, भीषम गोसाई, अनूप गोसाई, मंगला प्रसाद, सुरेन्द्र कुमार गोसाई, आदि का मेले में योगदान रहता है।

स्वयंसेवी संस्थाओं ने लगाए स्टाल

मेले में स्वयंसेवी संस्थाओं के लोग जगह-जगह स्टाल लगाकर भंडारा एवं स्वच्छ ठंडा जल की ब्यवस्था निःशुल्क कर मेले में आने वाले जरूरतमंदों की मदद करतें देखे गए। स्वयंसेवी संस्था के शैलेश मिश्र बाबा, विधान पाण्डेय, सन्दीप मिश्र सबलू, मुन्ना तिवारी, विजय शंकर, राम बचन सिंह, श्रवण मिश्र आदि लोग सक्रिय रहें।

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