बनारस के लाल डॉक्टर संपूर्णानंद जी व्यक्तित्व और कर्म और साहित्य क्षेत्र में योगदान

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  1. बनारस के लाल डॉक्टर संपूर्णानंद जी व्यक्तित्व और कर्म और साहित्य क्षेत्र में योगदान ||

( सन्तोष कुमार सिंह )

 

वाराणसी:- डॉक्टर संपूर्णानंद का व्यक्तित्व बहुत ही असाधारण था। लेकिन वे एक कुशल अध्यापक, साहित्यकार,कुशल राजनीतिज्ञ, प्रख्यात विचारक थे,भारतीय संस्कृति से अगाध प्रेम था।वे बनारस के नामी कायस्थ परिवार विजयानंद के घर 1जनवरी 1890 में हुआ था उनकी प्रारंभिक शिक्षा घर पर हुआ माध्यमिक शिक्षा हरिश्चंद्र में हुआ। बी एस सी क्वींस कॉलेज से किया। एलटी को इन्होंने प्रयागराज से किया। अध्यापन के कार्य में लगे थे।बीकानेर के डूंगरपुर कॉलेज में प्राध्यापक पे नियुक्ति हुई वे अध्यापन का कार्य छोड़कर स्वतंत्रता के समर में कूद पड़े।कई बार जेल जाना पड़ा।वे महात्मा गांधी के संपर्क में आए। बनारस वापस आने पे श्रद्धेय शिवप्रसाद गुप्त जी कहने से ज्ञान मंडल का कार्य किए।वे अपने मुख्यमंत्रित्व काल में राजकीय संस्कृत कालेज को विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाया। वे अपने समय पे पुराने कैदियों के लिए खुली जेल का प्रस्ताव पास कराया।

 

हिंदी साहित्य सम्मेलन के चेयर मैन रहे। बनारस मे नागरी प्रचारिणी सभा के चेयर मैन थे इन्हे भारत कई विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की उपाधि से नवाजा गया।10 जनवरी1969 को काशी में निधन हो गया। डॉक्टर संपूर्णनंद काशी के रत्नों में शूमार थे। राष्ट्रवादी चिंतक मंच के प्रधान कार्यालय गोष्ठी व चर्चा संपन्न हुई वक्ता ने कहा डॉक्टर संपूर्णानंद बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। भारत धर्म महामंडल के शंभूनाथ चतुर्वेदी , राजेश रायजी, अध्यापन कार्य से जुड़ी प्रियंका राय ,सीए सज्जन कुमार, कन्हैया लाल संगतानी जी आदि उपस्थित थे।

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