यह लेख बहुत मार्मिक और समझने वाला है ~ हनुमान जी ऐसा देखकर द्रवित जरूर होते होंगे!

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यह लेख बहुत मार्मिक और समझने वाला है ~

हनुमान जी ऐसा देखकर द्रवित जरूर होते होंग

सुन्दरकाण्ड की बुकिंग करने के बाद कई लोग फोन लगा-लगा कर कहते हैं कि पंडित जी! अच्छे से करना, मज़ा आ जाए एक दम। वैसे तो हम फलानी मंडली को बुलाते थे पर आपके बारे में सुना तो सोचा आपको बुलाएँ इसलिए ऐसा सुन्दरकाण्ड करना कि माहौल बन जाए। ऐसी बातें सुनकर लगता है कि जैसे हमें सुन्दरकाण्ड के लिए नहीं बल्कि मुजरा करवाने के मकसद से बुलाया जा रहा है।

 

सच में क्या अजीब मानसिकता हो गई है आज लोगों की? सुन्दरकाण्ड जैसी अद्धभुत हनुमान कथा को मनोरंजन बना कर रख दिया है। और ऐसा भी नहीं है कि वह सुन्दरकाण्ड की चौपाई सुनकर आनंदित होना चाहते हैं। नहीं! वह सुनना चाहते हैं तड़कता-भड़कता हुआ संगीत और साथ में तथाकथित भजन(जिन्हें भजन कहते भी लाज आती है)

 

हम सभी कहते हैं कि हमें अपनी संस्कृति बचानी है,धर्म बचाना है तो क्या ऐसे बचेगी संस्कृति? हमने हर चीज़ को तो मनोरंजन बना कर रख दिया है और फिर धर्म बचाने की बात करते हैं।

 

सुन्दरकाण्ड एक बहुत सामर्थ्यशाली, ऊर्जा प्रदायक, प्रेरणादायक,समाधान कारक, प्रबंधन के सूत्रों से भरा और शांति देने वाला एक अमूल्य साधन है पर हमने आज उसी सुन्दरकाण्ड की इतनी फ़जीती कर रखी है कि क्या ही कहा जाए और इसीलिए सुन्दरकाण्ड कराने का फल हमें नहीं मिल पाता क्योंकि हम सुन्दरकाण्ड के प्रति अपना भाव ही नहीं रखते बल्कि हमारा पूरा ध्यान मात्र थिरकने पर होता है।

 

मैं आश्चर्य से तो तब भर जाता हूँ कि लोग मुँह में गुटखा भरकर, बीच-बीच में चाय और शरबत की चुसकियाँ लेकर सुन्दरकाण्ड पाठ करते हैं और इसमें सबसे बड़े सहयोगी होते हैं आयोजक जो कि बीच-बीच में शरबत और चाय पैश करते हैं।

 

सुन्दरकाण्ड कराते समय एक आसन पर स्थिर होकर बैठना चाहिए। अगर बहुत जरूरी हो तो पानी लिया जा सकता है पर बीच-बीच में पार्टी की तरह शरबत और चाय लेकर नहीं घूमना चाहिए।

 

अतः निवेदन है कि अपनी संस्कृति और धर्म का उपहास न बनाएं। सुन्दरकाण्ड मनोरंजन का साधन नहीं है बल्कि उसमे श्री हनुमान जी का पवित्र चरित्र है।

निवेदक :- श्यामबाबू गुप्ता

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