जानिए क्या है? साप के काटते ही प्राथमिक उपचार पढ़िए पूरी खबर|

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भारत में हर साल करीब २.५ लाख सांप के काटने की घटनाएं होती हैं। इनमें से करीब ४६ हज़ार में मौत हो जाती है। इसके अलावा बहुत से मामलों की रिपोर्ट ही नहीं की जाती। बहुत से लोग गॉंव में ही सांप के काटने का इलाज करते हैं क्योंकि इलाज की सही सुविधाएं उपलब्ध नहीं होतीं। सांप के काटने की घटनाएं गॉंवों में ज्यादा होती हैं। महिलाओं के मुकाबले पुरुषों के साथ सांप काटने की घटनाएं ज़्यादा होती हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पुरुष बाहर ज़्यादा काम करते हैं।

गर्मियों और बारिश के दौरान ये घटनाएं ज़्यादा होती हैं क्योंकि इस मौसम में सांप गर्मी या बारिश के कारण अपने बिलों में से बाहर निकल जाते हैं। असमतापी के होने के कारण सांप सर्दियॉं सहन नहीं कर पाते और अपने बिलों में रहना ही पसंद करते हैं

सांप के काटने के बारे में कुछ तथ्य

सांप ज़्यादातर पैरों और बाहों पर ही काटते हैं। करीब ७० प्रतिशत बार पैर के निचले भाग में सांप काटता है क्योंकि सांप के लिए इस भाग तक पहुँचना आसान होता है। इसलिए सही जूतों (लंबे वाले जूतों) से कई जानें बचाई जा सकती हैं। सांप आमतौर पर सुबह या अंधेरे में काटते हैं यानी कि उस समय जब वो अपना भोजन खोजने बाहर निकलते हैं। इसलिए इस समय में ज़्यादा सावधान रहने की ज़रूरत होती है। एक टॉर्च या रोशनी के लिए किसी और तरीके का इस्तेमाल करें। सांप के काटने में से केवल २० प्रतिशत घटनायें जहरीले सांपों के काटने का होता है। अगर ज़हरीले सांप के काटने के तुरंत बाद ही सही उपचार उपलब्ध हो तो ज़्यादातर जाने को बचाई जा सकती हैं।

ज़हरीले और बिना ज़हर वाले सांप

जहरीला सांप कांटने पर दॉंतों के दो निशान होते है, ज्यादा निशान हो तो समझे की सांप जहरीला नहीं। सांप की बहुत सारी जातियॉं होती हैं। भारत में मिलने वाली सांप की ३०० जातियों में से ५० जहरीली होती हैं। इनमें से भी केवल ४ आम तरह के और सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। जहरीले सांपों में से नाग और करैत एक तरह के सांप हैं और वायपर एक अन्य तरह के। कई एक समुद्री सांप भी ज़हरीले होते हैं।

ज़हरीले सांपों की चौकड़ी

ज़हरीले सांपों द्वारा काटे जाने की घटनाओं में से आधी से ज़्यादा नाग और करैत के काटने की होती हैं। इसके बाद हराफिसी का नम्बर आता है और उसके बाद रसलस वाइपर का। कोबरा और करैत के ज़हर से खासकर दिमाग पर असर होता है। जबकी वाइपर से खून में ज़हर फैलता है।

ज़हरीले सांपों में से मण्यार सबसे ज़्यादा गुसैल सांप होता है। वाइपर उतना गुसैल नहीं होता। हांलाकि ज़्यादातर सांप तभी काटते हैं जब उन्हें छेड़ा जाता है पर यह हमेशा ही सच नहीं होता। सांप किसी भी चीज़ को ठीक से देख नहीं पाते इसलिए कोई भी हिलती डुलती चीज़ उनका ध्यान खींच लेती है। अगर कोई भी पैर सांप का रास्ता काटे तो सांप उस पर हमला करनेकी संभावना होती है। इसी तरह से घास आदि काटने के समय हाथों पर सांप काट लेते हैं। सांप के काटने से बचाव के लिए हाथों और पैरों को ठीक से सुरक्षित रखना बेहद ज़रूरी है।

आहत व्यक्ति के द्वारा दिए गए विवरण के आधार पर किसी सांप (कोबरा के अलावा) को पहचानना काफी मुश्किल होता है। क्योंकि जिस समय सांप काटता है तब अक्सर कम रोशनी होती है। इसके अलावा सांप बहुत तेज़ी से दौड़ते हैं। उन्हें ठीक से देख पाना संभव हो पाए इससे पहले ही वो भाग जाते हैं। डर और आघात सॉंप पहचानने में और भी मुश्किल पैदा कर देते हैं। इसलिए अगर व्यक्ति को सांपों के बारे में जानकारी न हो तो उसके द्वारा दिए गए विवरण के आधार पर सॉपका पता नहीं लगाया जा सकता। अगर सांप को मारकर लाया गया हो तो उसे पहचानना संभव होता है। सॉपका सिर पहचान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। ऊपरी जबड़े में ज़हर के दांत होना सांप के ज़हरीले होने की निशानी होती है। दांतों की जांच करने में सावधानी बरतें, उन्हें नंगे हाथों से छूने से बचें। सभी चार या पॉंच ज़हरीली तरह के सांप एक दूसरे से अलग तरह के होते हैं।

सांप का विष खून से कम लेकिन लसिका मार्ग से ज्यादा चढता है। सांप का ज़हर असल में प्रोटीन होता है। यह सांप के ऊपरी जबड़े में स्थित एक थैली में मौजूद रहता है। ऊपरी जबड़े के दोनों ओर स्थित एक एक थैली ज़हरीले दांतों की जड़ों में खुलती है। वाइपर के ज़हरीले दांत अंदर से नलीनुमा होते हैं (इन्जैक्शन की सूई की तरह) इसलिए ज़हर ठीक शरीर के अंदर चला जाता है। कोबरा और मण्यार के दांतों में एक खाली नली होती है जिससे होकर ज़हर काटे जाने वाली जगह में चला जाता है। सांप अपने दुश्मन को मारने के लिए ज़हर का इस्तेमाल करते हैं। मेढक या चूहे को मारने के लिए यह ज़हर काफी ज़्यादा होता है। परन्तु दूसरी ओर इंसानों या मवेशियों को मारने के लिए एक डंख के ज़हर की मात्रा लगभग पर्याप्त होती है। करैत का ज़हर किसी भी और सांप के ज़हर से ज़्यादा खतरनाक और विषैला होता है। छोटा वायपर के एक बार काटने से औसतन जितना ज़हर निकलता है उसकी मात्रा किसी मनुष्य को मारने के लिए जितना ज़हर चाहिए होता है उससे आधी होती है। सांप के निचले भाग की खाल से भी सांप को पहचानने में मदद मिलती है। ज़हरीले सांपों में शल्क एक तरफ से दूसरी तरफ बिना टूटे हुए फैले होते हैं। बिना ज़हर वाले सांपों में ये शल्क बीचमें विभाजित होते हैं।

सांप के ज़हर का असर

सांप के ज़हर में चार तरह के विषैले पदार्थ होते हैं –

  • तंत्रिका-विष मस्तिष्क पर असर करते हैं।
  • खून के जमने पर असर करते हैं।
  • हृदय पर असर करते हैं।
  • आस पास के ऊतकों को खतम कर देते हैं। मस्तिष्क विषों से दिल और श्वसन तंत्र के दिमागी केन्द्रों पर असर करते है। इससे जल्दही मृत्यु हो जाती है। इसी तरह से हृदय के रुक जाने से तुरंत मृत्यु हो जाती है। सांप के काटने से अचानक होने वाली मौतें दिल के जीवविषों के कारण होती हैं। परन्तु कुछ मौतें हद से ज़्यादा डर जाने के कारण होती हैं।

मस्तिष्क विष

करैत का जहर तंत्रिका तंत्र को बाधा करता है। डोमी या कोबरा का जहर तंत्रिका तंत्र को बाधा करता है। करैत और कोबरा में मस्तिष्क विष होते हैं। सांप के काटने पर ये ज़हर लसिका और खून में पहुँच जाते हैं। इनके द्वारा ये मस्तिष्क के केन्द्रों तक पहुँच जाते हैं। जीवन को सम्भालने वाले हृदय और श्वसन तंत्र काम करना बंद कर देते हैं। सौभाग्य से निओस्टिगमाइन नाम की दवा मस्तिष्क के लकवा करने के असर से बचाव कर देती है। इसका इंजेक्शन होता है।

खून के जीवविष

वाइपर वाला विष चंद मिनटो में खून के जमने की प्रक्रिया प्रभावित करता है। इससे मसूड़ों, गुर्दों, नाम, फेफड़ों, पेट, मस्तिष्क, दिल आदि में से खून निकलने लगता है। एक बार शुरु होने के बाद यह रक्त स्त्राव एक दो घंटों में जानलेवा हो सकता है।

सांप के काटने के लक्षण

ज़हरीले सांपों के काटने पर दांतों के दो निशान अलग ही दिखाई देते हैं। गैर विषैले सॉंप के काटने पर दो से ज्यादा निशान होते है। मगर यह निशान न दिखने से सॉंप नहीं काटा है, ऐसा सोचना गलत है। सॉंप विषके अन्य असर ज़हर के प्रकार और सांप के काटने के बाद बीते समय पर निर्भर करते हैं।

तंत्रिका तंत्र के असर

न्यूरो जीवविष से पलकें भारी होने लगती हैं – करीब ९५ प्रतिशत मामलों में यह सांप के काटने का पहला लक्षण होता है। इस लिए नींद आना सबसे पहला लक्षण होता है। इसके बाद निगलने और सांस लेने में मुश्किल होनी शुरु हो जाती है। सांस की दर नापने का तरीका एक उपयोगी तरीका है। (आहत व्यक्ति से कहना कि वो एक बार के सांस लेकर उंगलियों पर गिने) अगर हर अगली सांस के साथ गिनती कम और कम होती जाए तो इसका अर्थ है कि सांस लेने की क्षमता पर असर हो रहा है। अगर डंक जहरीला हो तब असर ज़्यादा से ज़्यादा १५ घंटों में दिखने लगता है। लेकिन सबसे पहले असर कुछ मिनटों में दिखाई देना शुरु हो सकता है। पर आमतौर पर यह असर आधे घंटे के बाद ही दिखना शुरु होता है

खून के जीवविष के लक्षण

जहरीला सांप कांटने पर दॉंतों के दो निशान होते है, ज्यादा निशान हो तो समझे की सांप जहरीला नहीं। जहरीले सांप के डंक से या तो पलके झपकने लगती है, या मसुडों से खून रिसने लगता है।

रक्त के कारण डंकसे और मसूड़ों और फिर अन्य जगहों से खून बहना शुरु हो जाता है। मसूड़ों से खून आना सबसे आम लक्षण है जो कि करीब ९५ प्रतिशत मामलों में दिखाई देता है। आमतौरपर लक्षण एक घंटे के अंदर अंदर दिखाई देने लगते हैं। ज़्यादातर असर २४ घंटों में दिखने लगते हैं। मैंने एक अपवाद भी देखा है जिसमें काटने के करीब तीन दिन बाद पेशाब में खून आना शुरु हुआ। शायद ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि डंकमें ज़हर की मात्रा कम गई थी। दोनों तरह के ज़हरीले सांप द्वारा काटने पर काटे जाने वाली जगह के ऊतकों में ऊतकक्षय होने और फिर उससे होने वाले ज़ख्मों का सड़ने लगना आम है। पर ऐसा वाइपर के काटने पर ज़्यादा होता है।

हृदयविष के लक्षण

हृदयविष से तुरंत दिल पर असर होता है। इससे हार्ट फेल होकर कुछ ही मिनटों में मृत्यु हो जाती है।

सांप के काटने पर इलाज के प्रचलित लोकपरंपरागत तरीके

  • सांप के काटने के इलाज के लिए कई सारे स्थानीय परंपरागत उपाय किये जाते हैं। सभी जहरीले सॉंप के विष के प्रति विफल है, मगर मरीज को थोडी तसन्नी देते है। इनपर समय व्यर्थ जाया न करे।
  • कुछ लोग एक खास तरह के पत्थर का इस्तेमाल करते हैं जिसे सांप पत्थर कहा जाता है। इससे कोई फायदा नहीं होता।
  • सबसे आमतौर पर लोग आहत व्यक्ति को कुछ घंटों के लिए मंदिर में रखते हैं। ८० प्रतिशत से ज़्यादा बार जो सांप का काटना ज़हरीला नहीं होता, इसलिए ज़्यादातर लोगों तो वैसे भी ठीक हो ही जाते हैं। लेकिन यह तरीका गलत है। मंदिर ले जाना इतनाही उपयोगी है क्योंकि इससे आहत व्यक्ति को थोड़ा सा दिलासा मिल जाता है। क्योंकि ज़्यादातर मामलों में आहत व्यक्ति की मौत तो डर के ही कारण होती है।
  • सांप डसने के ऐसे उपचार के तरीकों की कड़ी जांच करने की ज़रूरत है। क्योंकि सांप के काटने पर खतरा बहुत ही ज़्यादा होता है। सांप के काटने पर किसी भी तरह का जादुई इलाज भरोसेमंद नहीं होता है। सांप पालने वाले लोगों की भी सांप के काटने से मौत होने की बहत सी रिपोर्ट मौजूद हैं।
  • एक परंपरागत तरीका सांप के काटे वाली जगह पर चूज़ा लगाने का भी है। चूज़े की गुदा काटे वाली जगह पर लगाया जाता है। इसके लिए पहले काटे वाली जगह और चूज़े की गुदा दोनों पर कट लगाया जाता है। शायद चूज़े की गुदा आहत व्यक्ति के शरीर में से ज़हर खींच लेती है। ज़हर चूसने के बाद चूज़ा मर जाता है। इसके बाद दूसरे चूज़े का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन यह तरीका अब त्यागना चाहिये। न उससे जान बचेगी ना चूजे! वैसे पट्टियों का इस्तेमाल करके पैर को बांध देना मानक प्राथमिक उपचार है।

 

सांप के डंक के लिये प्राथमिक उपचार

  • हमें उपलब्ध सुविधाओं, आहत व्यक्ति की हालत और परिस्थिति से निपटने की अपनी तैयारी के अनुसार ही प्राथमिक उपचार के तरीके ढूंढने होते हैं। कुछ बुनियादी उपाय यह हैं –
  • कुछ लोग एक खास तरह के पत्थर का इस्तेमाल करते हैं जिसे सांप पत्थर कहा जाता है। इससे कोई फायदा नहीं होता।
  • आहत व्यक्ति को दिलासा दिलाएं और घटना के तथ्य पता करें।
  • गीले कपडे से डंक की जगहकी चमडी पोछ ले, लेकिन दवाऍ नही। पोछनेसे सांप का वहॉं पडा विष निकाला जाएगा।
  • घायल को करवटपर सुलाएँ, जिससे उलटी हो तब भी श्वसन-तंत्र में न चली जाएँ।
  • पैर या हाथपर जहॉं डंक हो एक खपच्ची बांध दें ताकि उसका हिलना डुलना बंद हो जाए। इससे उस भाग में संचरण कमद हो जाता है।
  • शरीर का उंचवाला अंग हृदयकी अपेक्षा नीचे के स्तर पर रखे इससे विष संचरणमें आनेसे बचाव होगा।
  • अगर काटने में ज़हर हो तो उसके लक्षणों की भी जॉंच करें। अक्सर जिस सांप ने काटा है वो नुकसान रहित होता है।
  • टूर्निके का इस्तेमाल नहीं करें। इससे पैर में से काटे हुए स्थान से खून निकल सकता है और इससे पैर काला भी पड़ सकता है (कोथ)। काटी हुई जगह पर कट न लगाएं। दबा कर ज़हर निकालने के लिए पहले ऐसा किया जाता था। यह तरीका काम तो करता नहीं है पर इससे काटे हुए स्थान पर संक्रमण होने की संभावना ज़रूर बढ़ जाती है।
  • जिस व्यक्ति को सांप ने काटा है उसे तुरंत अस्पताल पहुँचाएं।
  • रस्सी बांधना या ब्लेड से काटना असल में हानीकारक है  रस्सी बांधना या ब्लेड से काटना असल में हानीकारक है

 

ये न करे

  • डंक की जगह काटना, चूसना, दबाना बिल्कुल न करे।
  • डोरी कसकर बांधना बिल्कुल न करे। ईससे ज्यादा खून बहकर खतरा संभव है।
  • प्रेशर पट्टी बांधना जरुरी या उपयोगी नही।

 

प्राथमिक उपचार में दवाएँ

अक्सर काफी कुछ इस पर निर्भर करता है कि आसपास कोई अच्छा इलाज का केन्द्र है या नहीं। अगर मस्तिष्क के लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो निओस्टिगमाइन और एट्रोपिन के इन्जैक्शन देने शुरु कर दें। इससे आप उस व्यक्ति को खतरे से बचा सकेंगे और आपको एक घंटा और का समय मिल जाएगा। एक घंटे के बाद आप ये इन्जैक्शन फिर से दे सकते हैं। प्राथमिक उपचार के रूप में ए.एस.वी. की उपयोगिता के बारे में थोड़े से सवाल हैं क्योंकि इससे घातक एनाफाईलैक्टिक क्रिया होने का खतरा होता है। इससे मौत भी हो सकती है। इसलिए इसे प्राथमिक उपचार के रूप में न प्रयोग करे।

अस्पताल में उपचार

अगर ज़हर के लक्षण हों, तो प्रति सांप ज़हर और अन्य प्रतिकारक दिए जाते हैं। अगर सांस लेने में मुश्किल होने लगी है तो जीवन बचाने वाले तरीकों की ज़रूरत पड़ेगी।

सांप ज़हर प्रतिरोधी दवा (ए.एस.वी)

ए.एस.वी. में भारत में पाए जाने वाले सभी ज़हरीले सांपों के ज़हर के विरुद्ध सीरम होता है। सांप के ज़हर को इन्जैक्शन को देकर और उनके खून में से प्रोटीन निकाल कर इसे बनाया जाता है। ए.एस.वी. एक सफेद रंग के चूर्ण के रूप में छोटी सी शीशी में मिलता है। इस्तेमाल करने से पहले इसे जीवाणु रहित किए हुए पानी में मिला लिया जाता है। इसकी तीन या उससे ज़्यादा खुराक चाहिए होती हैं। ए.एस.वी. अंत:शिरा या अंत:पेशीय ढंग से दिया जाता है। ए.एस.वी. से सांप का ज़हर कट जाता है। परन्तु अगर मस्तिष्क के केन्द्रों तक कोई ज़हर पहुँच जाए तो वो इससे नहीं कट पाता है। इसलिए ए.एस.वी. जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी देना चाहिए।

ए.एस.वी. से घातक प्रतिक्रिया भी हो सकती है

ए.एस.वी. से मौत तक हो सकती है क्योंकि यह किसी और जानवर (घोड़े) से लिया हुआ प्रोटीन होता है। यह प्रतिक्रिया कुछ कुछ पैन्सेलीन से होने वाली प्रतिक्रिया जैसी होती है। इसलिए इसका इलाज भी कुछ कुछ वैसा ही होता है। इसी प्रतिक्रिया के कारण से स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए इसे देना थोड़ा खतरे वाला होता है। पर अगर ज़हरीले सांप ने ही काटा हो और कहीं से भी कोई भी मदद नहीं मिल रही हो तो ए.एस.वी. देने का खतरा उठाना ही पड़ता है। देरी होने पर मौत होने की तुलना में प्रतिक्रिया होने की संभावना कम होती है। ऐसे स्वास्थ्य कार्यकर्ता को ज़रूर पता होना चाहिए कि ऐनाफिलेक्टिक प्रतिक्रिया का इलाज कैसे काना होता है।

सांप के काटने पर काटी हुई जगह पर होने वाला नुकसान

कभी कभी सांप काटने की जगह में लंबे अर्से तक घॉंव बन जाते है। सभी तरह के सांप के काटने में गंभीर ऊतक क्षति (ऊतकों की मौत) होने की संभावना होती है। यह विष कोशिकाओं को बडा नुकसान पहुँचा देते हैं। एक या दो दिनों में गंभीर सूजन, दर्द, खून बहने, संयोजक ऊतिशोथ और त्वचा के काला पड़ना आदि प्रभाव दिख सकते हैं। ऐसे घाव में अल्सर भी हो जाता है और इसके ठीक होने में कई हफ्ते लग सकते हैं। नियमित रूप से घाव की देखभाल करने और प्रतिजीवाणु दवाएँ देने से फायदा होता है। करैत के काटने से ऐसे स्थानीय प्रभाव बहुत कम होते है। गॉंवों में सांप का काटना एक गंभीर दुर्घटना होती है। परन्तु गॉंव में इलाज की सुविधा नहीं के बराबर होती है। अच्छी प्राथमिक चिकित्सा अगर सही समय पर मिल जाए तो ६० से ७० प्रतिशत लोगों की जान बच सकती है।

सर्पदंश

सॉंप डसने का डर हर किसी को होता है। सर्पदंश घातक है या विषहीन यह पहेचानने के लिये कुछ जानकारी जरुरी है। हमारे देश में सिर्फ ४ या ५ सांप विषैले है। इनको हम देखकर आसानी से पहचान सकते है। विषैले सापों के दो लंबे उपरी दांत विषेले होते है। शरीर में यह विष धमनियों से नही तो लसि का संस्थानसे फैलता है। इसिलिये सौम्य दबाव से भी हम उसको रोक सकते है। प्राथमिक इलाज देकर हम बाधित व्यक्ति को अक्सर बचा सकते है। इसके लिये आगे चलकर कुछ विवरण दिया है।

वैज्ञानिक प्राथमिक इलाज

पीडीत व्यक्तिको लेटे रहने को कहिये। काटी हुएँ अंग को गीले कपडे से हल्के से साफ किजिये। पीडीत व्यक्ति को धीरज के साथ लेटे रहने से कहिये। इससे विष कम फैलता है। अब ४-६ इंच चौडी इलॅस्टिक क्रेप बँडेज लिजिये। यह बँडेज नही है तो ओढनी या साडी या धोती आदि की पट्टी इस्तेमाल कर सकते है। कांटे हुए हाथ या पैर को निचे से उपर तक यह पट्टी हलके दबाव के साथ बांधिये। हल्के दाब का निशान ये है की उसमें हम उंगली प्रविष्ट कर सकते है। अब २-३ फीट लंबी एक लाठी या प्लॅस्टिक पाईप लेकर इस अंग को बांध दे। इससे उस अंग की हलचल कम होगी। अब पीडित व्यक्तिको बांबू और चद्दर के स्ट्रेचर पर लेकर अँब्युलन्समें रखे। डॉक्टरोंको फोन पर पूर्वसूचना देनी चाहिये।

घबराहट हानीकारक होती है। इससे शरीरमें विष जल्दी फैलता है। दंश की जगह जख्म ना करे। इससे संक्रमण की आशंका बढती है। अपने मुँहसे विष चूसनेका प्रयास मत किजीये। पिडीत अंगपर रस्सी न कसे। यह बहुत नुकसानदेह होता है। मंदिर या झांड फूंकमें व्यर्थ समय नही गवॉंना चाहिये। अस्पताल पहुँचनेके पहले पट्टी नही छोडना चाहिये। यह भूल जानलेवा हो सकती है। अस्पतालमें इंजेक्शन देनेके बाद डॉक्टर पट्टी छोडेंगे

अन्य जानकारी

हमारे देश में चार प्रमुख जाती के साथ विषेले होते है। उसमे नाग, क्रेट याने बंगारस, दुबोइया और फुरसा ये जातीयॉं है। अगर सॉंप मारा है तो अस्पताल ले चलीये।

कुछ व्यक्ति केवल डरसे ही बेहोश होते है। सर्पविष के लक्षण देखने के लिये कम से कम आधा घंटा अवधी लग सकता है।

ध्यान में रखे

कुछ लक्षण घातक है जैसे की पीड़ित व्यक्ति को सुस्ती या निद्रा आना, बोलने में लडखडना या भारीपन, श्वसन के समय तकलीफ, मसुडोंसे खून चलना या कही भी रक्तस्त्राव।

सही प्राथमिक इलाज से हम रोगी को बचा सकते है। सही प्राथमिक इलाज से डॉक्टरी इलाज भी ज्यादा आसान होता है

ज्यादा कुशल आरोग्यकर्मीयों के लिये जानकारी

नाग या क्रेट सॉंप कॉंटनेपर मस्तिष्क पर दुष्प्रभाव होता है। इस दुष्प्रभाव को रोकने के लिये निओस्टिगमिन और ऍट्रॉपिन इंजेक्शन की जरुरी है। ये इंजेक्शन हर आधे घंटे को देना चाहिये। सॉंप के विष पर सिरम का इंजेक्शन सिर्फ अस्पताल में ही देना चाहिये। इस इंजेक्शनको भी ऍलर्जी का खतरा संभव है।

 

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